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Breakup Whatsapp Status & Shayari in Hindi

Whatsapp breakup status and hindi Shayari

कुछ ज़ख्म है। जो की दिखते नहीं मगर ये मत समझिये की दुखते नहीं।

मेरा किरदार बिना इश्क़ के जचेगा क्या। अगर खुद से तुम्हे निकाल दू तो बचेगा क्या। 

तुम लोग तो बस अल्फाजो को पढ़ लेते हो, कभी सोचा कितना दर्द बड़ा होगा तब ये अलफ़ाज़ कलम तक आये होंगे

तनहा रह गया मै क्या करू तुझे भूल जाना मेरे बस की बात नहीं। 

जो भूल गया है उसे भुला देते है। चलो इन तस्वीरों  को चुम कर जला देते है। 

मैं इश्क़ कहूंगा तो क्या वो मान जाएंगे। चलो छोड़ो यार लोग जान जाएंगे।

एक ज़रा सी खता की ये कैसी सजा देते हो। बात बात पर अपनाते हो फिर भुला देते हो। 

में दुसरो को जीना सीखा रहा हु। मगर में खुद ही गलत जा रहा हु। 

इश्क़ सभी को होता है, मालुम है हमें।  हमें डर है कि पागल न होजाए कहीं। 

जब चेहरे से उनके नक़ाब उतारे गए दोस्त कहने वाले कई दुश्मन मारे गए। 

वो मुझको समझ नहीं पता।  मुझे उसको कहना  नहीं आता। 

मेहबूब न मिले तो डरता कौन है, आजकल इश्क़ जी-जान से करता कौन है। 

उम्र के साथ शौख भी बदल जाएंगे। देखना कुछ दिनों में लोग भी बदल जाएंगे। 

कश्मकश है ये भी की झूठ कितना बोला जाए। कितना सच है इश्क़ में ये कैसे तोला जाए। 

हर वक़्त उदासी का एक साया रहता है। आजकल न जाने क्यों जी घबराया रहता है। 

अपनी बेइंतेहा मोहब्बत को कैसे कहे हम। तुझसे जुदा होकर भी बस  इक तेरे ही रहे हम। 

तेरे इश्क़ का रस चखकर ज़हरीली होगयी है जिंदिगी आजकल। 

जिंदिगी तो औरों ने गुज़ारी है, मुझपर तो बस ख्वाबो की उधारी है। 

कभी सवरता हु कभी बिखरता हु, ऐ जिंदिगी देख में खुद के साथ क्या क्या करता हु। 

दर्द की गवाही चल रही है, लोगो की आवाजाही चल रही है। 

हम इश्क़ कहते है वो तलिफ़ा मानता है। जो हमसे इश्क़ करने का वज़ीफ़ा मांगता है। रिश्ते नित नए बनाता बिगाड़ता है वो, न जाने क्यों खुद को खलीफा मानता है। 

शब्द-शब्द पिरो कर एक नज़्म बनाते हैं। चलो हम और तुम मिलकर हम बनाते है। 

उनके दिए ख्वाब लौटा दिए मैंने। उनको कहो मेरी नींद लौटा दें अब।  

आज इशारो में गुफ्त-गु कर लेते है , लफ्ज़ सुनकर लोग हंगामा मचा देते है। 

मुझे मुकम्मल आशिक़ी की दुआ न दो। जितनी भी की है अधूरी ही रही। 

जितने थे गम वो हसकर टाल दिए मैंने। जो कांटे चुभने लगे थे, वो कांटे निकल दिए मैंने। 

बहुत ज़ोर दिया जिंदिगी ने तब बोला।  मेने फिर एक एक करके सबका राज़ खोला।

इश्क़ कर लूंगा दोबारा यही सोचा मैंने। पर तुम्हारे जाने के बाद भी, तुम्हारा ही सोचा मैंने। 

मुझसे क्यों पूछते हो जवाब मेरा। मेरी खामोशी भी तो इक जवाब है। 

आँखों से भरोसे के अब ख्वाब उतर जाए। कर लेंगे दोस्ती भी पहले नक़ाब उतर जाए। 

हर दफा मुझसे मेरी रूह पूछते हो। मुहब्बत है ??? ये बार बार क्यों पूछते हो। 

चलो चल के उसे थोड़ा और समझाया जाए। दिल उसका है तो कही और क्यों लगाया जाए। 

कभी हवा का रुख देगा। यह सोचकर बवंडर नहीं बदला। गाहे-बगाहे याद करोगे तुम यह सोचकर नंबर नहीं बदला। 

जलती रोटी तवे से बचाते रहे हम। यही सोच कर अपना ही हाथ जलाते रहे हम। 

हम तो बस ख्वाब देखते है फिर तोड़ देते है। चलो फैसले वक्त के अब वक़्त पर ही छोड़ देते है। 

रात की यादों का उधार बाकी है। नींदें अभी भी कई हज़ार बाकी है।  

यादें अगर कमज़ोरी बने तो नफरत में बदल लो। उसे भी बेहतर है मोहब्बत होने से पहले ही सम्भल लो। 

अब तलक इश्क़ की ख़ुमारी रखी। इश्क़ की जंग हार कर भी जारी रखी।  

ज़ख्म रेशम की सलवटों से नहीं होंगे। जो आज है वो क्या पता कल नहीं होंगे। 

फूल और खुसबू में ये बात चल रही है। ये तितलियाँ किसके सहारे पल रही है। 

 तेरी यादों को अब दगा दिया जाए। दिल थोड़ा कहीं और लगा लिया जाए। 

आँखों पे पलकों के पहरे है सबके। इस दुनिया में दो चेहरे है सबके। 

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